किसी भीड़ में मानवता भी कहीं खो गयी है

अगली बार आपसे मदद की उम्मीद लगाए किसी पीड़ित को सड़क पर देखें तो एक बार उसकी जगह खुद को रख कर देखें । फिर भी अगर ज़िम्मेदारी का एहसास न हो, तो आगे बढ़ जाएं। फिर आपसे कोई भी उम्मीद करना बेकार है।

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